✍️ कोरबा:* बारिश क्या हुई, कोरबा की सड़कों ने अपना नया रूप धारण कर लिया। मानिकपुर-दादर जाने वाले रास्तों से लेकर शहर की गलियों तक जगह-जगह पानी ही पानी नजर आ रहा है। ऐसा लग रहा है मानो नगरीय प्रशासन ने सड़क नहीं, बारिश के मौसम के लिए मुफ्त का वाटर पार्क तैयार कर दिया हो।
जहां लोग सड़क पर चलने के लिए निकले थे, वहां अब उन्हें यह पता लगाना पड़ रहा है कि *सड़क किधर है और तालाब किधर!* दोपहिया वाहन चालक पानी में ऐसे सफर कर रहे हैं, जैसे रोज का नहीं बल्कि मानसून स्पेशल एडवेंचर हो।
व्यंग्य की बात करें तो शहर की जलनिकासी व्यवस्था शायद बारिश का इंतजार ही करती रहती है। बारिश शुरू होते ही नालियां अपना पानी सड़क को और सड़क अपना रूप तालाब को दे देती है। *नगरीय प्रशासन की व्यवस्था इतनी ‘चाक-चौबंद’ नजर आ रही है कि पानी को सड़क छोड़ने की कोई जल्दी ही नहीं है।*
हर साल बारिश आती है, जलभराव होता है, लोग परेशान होते हैं और फिर पानी उतरने के बाद मामला भी उतर जाता है। सवाल यह है कि *अगर शहर की सड़कें हर बरसात में तालाब बननी ही हैं, तो फिर नालियों और जलनिकासी व्यवस्था पर खर्च होने वाला पैसा आखिर किस काम का है?*
फिलहाल कोरबा की जनता के लिए सलाह यही है—जरूरी काम से निकलें तो छाता जरूर लें, और अगर पानी ज्यादा दिखे तो तैराकी सीखकर निकलें! 😄
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*प्रदीप राव ✍️*

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