✍️ कोरबा | विशेष रिपोर्ट
जिले में विकास कार्यों के नाम पर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी फंड के उपयोग और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) द्वारा सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली सड़क के निर्माण के लिए अब जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
**क्या है पूरा मामला?**
यह सड़क लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा उपयोग BALCO के भारी वाहनों, ट्रांसपोर्ट और औद्योगिक गतिविधियों के लिए होता है। आम नागरिकों की आवाजाही इसके मुकाबले काफी कम बताई जा रही है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सड़क का प्रमुख उपयोग एक निजी औद्योगिक इकाई कर रही है, तो उसके निर्माण और रखरखाव का खर्च सार्वजनिक फंड से क्यों उठाया जा रहा है।
**पुराना रिकॉर्ड क्या कहता है?**
करीब 12 साल पहले ध्यानचंद चौक से परसाभाठा बाजार तक की इसी सड़क की मरम्मत BALCO ने खुद कराई थी। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी ने उस समय इस मार्ग में अपनी भूमिका और उपयोग को स्वीकार किया था।
लेकिन अब, जब फिर से निर्माण की जरूरत पड़ी, तो पूरा बोझ DMF फंड पर डाल दिया गया है—यही बदलाव अब विवाद की जड़ बन गया है।
💰 **DMF फंड पर सवाल**
DMF फंड का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है—जैसे सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा।
ऐसे में, इस फंड का उपयोग उस सड़क पर करना, जिसका मुख्य लाभ एक औद्योगिक कंपनी को मिलता है, इसके मूल उद्देश्य पर सवाल खड़ा करता है।
BALCO मॉडल’ पर बहस तेज
स्थानीय स्तर पर इसे एक नए “मॉडल” के रूप में देखा जा रहा है—जहां इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग निजी होता है, लेकिन खर्च सरकारी फंड से किया जाता है।
यानी फायदा कंपनी का और बोझ जनता के संसाधनों पर।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
* क्या सड़क के उपयोग का सही आकलन हुआ?
* क्या कंपनी की भागीदारी सुनिश्चित की गई?
* या DMF फंड को आसान विकल्प मान लिया गया?
ये सवाल अब सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वहां करोड़ों रुपये ऐसे कार्यों पर खर्च करना प्राथमिकताओं की गंभीर गड़बड़ी को दर्शाता है।
यह मामला सिर्फ एक सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली और सोच को दर्शाता है। अब देखना होगा कि इस पर जवाबदेही तय होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

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