
✍️हमेशा विवादों में रहने वाले बालकों की तानाशाही अब बढ़ती ही चली जा रही है क्योंकि वहां के निवासियों को ही न रोजगार मिल रहा है। ना ही किसी प्रकार की सुविधा लोग इतने मजबूर हो गए हैं कि उन्हें धरने पर बैठना पड़ जा रहा है लेकिन उसके बाद भी वेदांता की नींद नहीं खुल रही। 68 दिन से बैठे लोग लेकिन बालकों की नजर इन पर नहीं पड़ रही क्योंकि वो तो अपने काम में व्यस्त हैं और बाहरी लोगों को रोजगार देकर वाह वई लूटने में लगा है लोगों का यह कहना है कि पैसों के दम पर बालकों सभी को खरीद लेता है वहां के निवासियों ने बताया कि जब हमने यहां टेंट और माइक लगाने की कोशिश की गई तो बालकों ने इजाजत नहीं दिया जितना पैसा हम टेंट वालों को देते हैं उसे डबल पैसा बालकों वेदांता देकर लगाने से मना कर देता है अगर इतना ही पैसा उनके पास है तो वहां के निवासियों को असुविधा का सामना क्यों करना पड़ रहा है? क्यों उन्हें धरने में बैठकर अपनी मांगों को मांगना पड़ रहा है। यह पहला मामला नहीं है पहले भी कई लोग न्याय मांगने की कोशिश की लेकिन वेदांता ने सब के मुंह में ताला लगा दिया जाता हैं । और प्रशासन खामोश हम लगातार बालकों के हो रहे अन्याय को प्रकाशन में लाकर न्याय दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे।
68 दिनों से धरने पर बैठे शांति नगर वासी, पुनर्वास और रोजगार की मांग
बालको वेदांता पावर प्लांट के कूलिंग टॉवर से प्रदूषण का आरोप, 8 सूत्रीय मांगों पर अड़े लोग
बालको वेदांता पावर प्लांट (1200 मेगावाट) के कूलिंग टॉवर से प्रभावित शांति नगर के निवासी पिछले 68 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। शांति नगर संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में पुनर्वास और स्थायी रोजगार की मांग प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।
संघर्ष समिति के अनुसार, कूलिंग टॉवर से निकलने वाले प्रदूषण के कारण शांति नगर के लोग सीधे प्रभावित हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनका क्षेत्र प्लांट से 100 मीटर की परिधि में आता है, जिससे स्वास्थ्य और जीवन-यापन पर असर पड़ रहा है।
प्रभावित परिवारों ने 8 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी, 5-5 डिसमिल जमीन पर पुनर्वास, उचित मुआवजा, जमीन की रजिस्ट्री पर लगे प्रतिबंध को हटाना, मुफ्त चिकित्सा सुविधा, पुनर्वास तक बिजली-पानी और टैक्स का खर्च कंपनी द्वारा वहन करना, अवैध उद्योगों का स्थानांतरण और 2 लेन सड़क निर्माण शामिल है।
“हम 16 फरवरी से धरने पर बैठे हैं। आज 68वां दिन है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। पुनर्वास और रोजगार हमारी मुख्य मांग हैं,” — सौरभ अग्रवाल, शांति नगर संघर्ष समिति
उन्होंने बताया कि बालको प्रबंधन के साथ दो बार बातचीत हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला। “फिलहाल आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन मांगें पूरी नहीं हुईं तो भूख हड़ताल की जाएगी,” उन्होंने चेतावनी दी।
प्रदर्शनकारियों ने बताया है कि बालको प्रबंधन अपनी छवि बचाने के लिए स्थानीय टेंट हाउस संचालकों पर दबाव बना रहा है, ताकि धरने के लिए आवश्यक सामान उपलब्ध न कराया जाए।
लंबे समय से जारी इस धरने से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या आंदोलन और उग्र रूप लेता है

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