✍️ ई-निविदा से लेकर कार्यादेश, कार्यस्थल और भुगतान तक कई स्तरों पर समस्याओं का आरोप; लंबित भुगतानों से लाखों रुपये अटकने की बात
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा में निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों ने निगम की निविदा प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। ठेकेदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने निगम आयुक्त को पत्र सौंपकर पिछले करीब एक वर्ष से सामने आ रही विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग की है। ठेकेदारों का कहना है कि निविदा प्रक्रिया से लेकर कार्यादेश, कार्यस्थल उपलब्ध कराने और निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद भुगतान तक की प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
निविदाओं में कंडिकाएं बढ़ने पर जताई आपत्ति।
ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब एक वर्ष से निगम की ई-निविदाओं और मैनुअल निविदाओं में ऐसी विभिन्न कंडिकाएं जोड़ी जा रही हैं, जिनके कारण ठेकेदारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि निविदा प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक योग्य ठेकेदार प्रतिस्पर्धा में शामिल हो सकें।
कार्यादेश के बाद भी कार्यस्थल मिलने में परेशानी।
ठेकेदारों के मुताबिक निविदा प्रक्रिया पूरी होने और कार्यादेश जारी होने के बाद भी कई मामलों में कार्यस्थल उपलब्ध कराने में कठिनाइयां सामने आती हैं। इससे निर्माण कार्य समय पर शुरू नहीं हो पाते और कार्य पूर्ण करने की निर्धारित समय-सीमा भी प्रभावित होती है।
बिल बनने से भुगतान तक लंबी प्रक्रिया।
ठेकेदारों ने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बिल तैयार होने से लेकर भुगतान जारी होने तक की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विभिन्न औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं के चलते भुगतान में लगातार देरी हो रही है। इसका सीधा असर ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी पर पड़ रहा है और नए निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
विभिन्न मदों में राशि उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा।
आयुक्त को सौंपे गए पत्र में ठेकेदारों ने अधोसंरचना, स्वच्छ भारत मिशन 2.0, मरम्मत-संधारण तथा मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण सहित विभिन्न मदों के कार्यों के भुगतान में राशि उपलब्ध नहीं होने की समस्या भी उठाई है। ठेकेदारों के अनुसार 40:40:20 की व्यवस्था के चलते भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे लंबे समय से राशि अटकी हुई है।
रॉयल्टी क्लियरेंस और दंड को लेकर भी नाराजगी।
ठेकेदारों ने रॉयल्टी क्लियरेंस की प्रक्रिया और लगाए जा रहे दंड को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट एवं पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि ठेकेदारों को अनावश्यक आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
पार्षद निधि के कार्यों का भुगतान भी लंबित।
ठेकेदारों ने विशेष रूप से पार्षद निधि वर्ष 2024-25 के तहत किए गए निर्माण कार्यों के भुगतान का मुद्दा उठाया है। उनका दावा है कि इन कार्यों की राशि लंबे समय से लंबित है। कई बार पत्राचार किए जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने से ठेकेदारों की लाखों रुपये की राशि अटकी हुई है।
‘किसी व्यक्ति विशेष को लाभ’ पहुंचाने की आशंका जताई।
ठेकेदारों ने निविदाओं में लगाई जा रही कुछ कंडिकाओं और भुगतान व्यवस्था को लेकर किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाए जाने की आशंका भी व्यक्त की है। हालांकि यह ठेकेदारों द्वारा उठाई गई आशंका है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की है।
भुगतान में देरी से विकास कार्य प्रभावित होने का दावा।
ठेकेदारों का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से उनकी वित्तीय स्थिति प्रभावित होती है। निर्माण सामग्री, मजदूरी और अन्य खर्चों का भुगतान समय पर करना मुश्किल हो जाता है। इसका असर नए कार्यों की गति और पहले से स्वीकृत निर्माण कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने पर भी पड़ सकता है।
आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग।
ठेकेदारों ने निगम आयुक्त से निविदा प्रक्रिया में व्याप्त समस्याओं की समीक्षा करने, कार्यादेश के बाद कार्यस्थल शीघ्र उपलब्ध कराने, भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने तथा लंबे समय से लंबित भुगतानों को जल्द जारी कराने की मांग की है।
ठेकेदारों का कहना है कि यदि निविदा और भुगतान व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाते हैं तो इससे केवल ठेकेदारों की समस्याएं ही दूर नहीं होंगी, बल्कि नगर निगम के विकास एवं निर्माण कार्यों में भी तेजी आएगी। अब देखना होगा कि ठेकेदारों द्वारा उठाए गए इन सवालों पर नगर निगम प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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