✍️ **कोरबा (छत्तीसगढ़):**
“ग्रीन ड्रामा, ग्राउंड पर कब्जा” — BALCO पर लग रहे आरोप अब एक पैटर्न का रूप लेते दिख रहे हैं। ताज़ा मामला मितान भवन के पास का है, जहां दो साल पहले जिस जमीन पर बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया था, आज वही क्षेत्र निर्माण कार्यों से घिरा नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां पहले नर्सरी विकसित की गई थी। अधिकारियों की मौजूदगी में पौधे लगाए गए, फोटो खिंचवाए गए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं — न पौधे बचे, न नर्सरी, सिर्फ सड़क और प्रस्तावित थिएटर निर्माण के निशान।

**अवैध सड़क निर्माण के आरोप**
ग्रामीणों के अनुसार, जिस सड़क का निर्माण किया जा रहा है, वह कथित रूप से बिना अनुमति हो रहा है। आरोप है कि BALCO प्रबंधन द्वारा अपने उपयोग के लिए बनाई जा रही इस सड़क के लिए वैधानिक स्वीकृति नहीं ली गई।

**वन विभाग की चेतावनी बेअसर?**
वन विभाग पहले ही कंपनी को चेतावनी दे चुका है। 01 अक्टूबर 2024 को उत्तर कोरबा के उपवनमंडलाधिकारी द्वारा जारी पत्र में बिना अनुमति पेड़ कटाई और निर्माण को गंभीर वन अपराध बताया गया था।
इसके बावजूद, जमीनी हालात संकेत देते हैं कि न तो काम रुका, न विवाद सुलझा।
**खसरा 543/1: कागजों में हरियाली, जमीन पर राख**
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। खसरा नंबर 543/1 में पौधारोपण की अनुमति दी गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि वहां राखड़ बांध बना दिया गया।
यानि कागजों में हरियाली, जबकि जमीन पर राख और कंक्रीट हावी है।
**2024 का सवाल: एक महीने में क्या बदला?**
जानकारी के अनुसार, 2024 में तत्कालीन एसडीओ आशीष खैरवार ने वृक्षारोपण में अनियमितताओं को लेकर BALCO को नोटिस जारी किया था।
लेकिन महज एक महीने बाद, 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) को उसी क्षेत्र में उनकी मौजूदगी में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
ऐसे में सवाल उठता है — आखिर एक महीने में ऐसा क्या बदल गया?
**“लायजन सिस्टम” पर संदेह**
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कंपनी द्वारा विभिन्न विभागों से समन्वय के लिए एक लायजन नेटवर्क सक्रिय है। आरोप यह भी हैं कि इसी तंत्र के जरिए विवादित कार्यों को वैध स्वरूप देने की कोशिश होती है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
**“एक पेड़ के बदले तीन पौधे” — सिर्फ दावा?**
वृक्ष कटाई के बदले तीन गुना पौधारोपण का दावा जमीनी स्तर पर नजर नहीं आता। न पर्याप्त पौधे दिखते हैं, न उनकी निगरानी का कोई स्पष्ट तंत्र।
चेतावनी, नोटिस और जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है।
क्या यह लापरवाही है या सिस्टम पर किसी तरह का दबाव?
**कोरबा के भविष्य पर खतरा**
पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे कोरबा में हरियाली खत्म कर निर्माण करना पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा है।
यदि यही पैटर्न जारी रहा, तो आने वाले समय में शहर की बची-खुची हरियाली भी संकट में पड़ सकती है।
जरूरत है निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की—ताकि सच सामने आए और कानून का पालन सुनिश्चित हो सके।

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