✍️ एक दशक से स्थायी भवन का इंतजार, शिक्षक पदों पर नियुक्ति शून्य; सीनियर छात्राओं से जूनियर की पढ़ाई कराने की नौबत, परिवहन सुविधा के अभाव में अस्पताल पहुंचने को मजबूर छात्राएं।

कोरबा। जिस नर्सिंग शिक्षा के जरिए भविष्य के स्वास्थ्यकर्मी तैयार किए जाने हैं, उसी सरकारी GNM कॉलेज कोरबा की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कॉलेज में शासन द्वारा स्वीकृत 6 शिक्षक पदों के रिक्त होने, वर्षों से स्थायी भवन उपलब्ध नहीं होने और छात्राओं के लिए नियमित परिवहन सुविधा के अभाव की जानकारी सामने आई है। वर्तमान में कॉलेज का संचालन सुभाष चौक के पास स्थित वर्किंग वूमंस हॉस्टल में किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नर्सिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र की पढ़ाई के लिए स्वीकृत शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं, तो 86 छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्याप्त प्रशिक्षण कैसे मिल रहा है?
6 पद स्वीकृत, लेकिन नियुक्ति शून्य।
कॉलेज के लिए शासन ने 6 शिक्षकों के पद स्वीकृत किए हैं, लेकिन वर्तमान में सभी पद रिक्त बताए जा रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासन स्तर पर पत्राचार किए जाने की बात कही गई है, लेकिन अब तक नियमित नियुक्ति नहीं हो सकी है।
कॉलेज में एक प्राचार्य पदस्थ हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के 3 कर्मचारियों की व्यवस्था कर छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। बताया गया है कि इन कर्मचारियों के पास B.Sc. Nursing की योग्यता है, लेकिन विभागीय जिम्मेदारियों के कारण वे नियमित रूप से कॉलेज में कक्षाएं नहीं ले पातीं।
इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ने की बात सामने आ रही है।
शिक्षक नहीं तो सीनियर छात्राएं बनीं जूनियर की ‘टीचर’।
व्यवस्था की सबसे चिंताजनक तस्वीर यह है कि पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार सीनियर छात्राओं को ही जूनियर छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है।
सवाल यह नहीं है कि छात्राएं एक-दूसरे की मदद क्यों कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था उस संस्थान के लिए पर्याप्त है, जहां से भविष्य में मरीजों की देखभाल करने वाली प्रशिक्षित नर्सें तैयार होनी हैं?
नर्सिंग शिक्षा में केवल परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। विद्यार्थियों को थ्योरी के साथ-साथ व्यावहारिक और क्लीनिकल प्रशिक्षण भी मजबूत तरीके से मिलना जरूरी है।
86 छात्राएं, शिक्षक व्यवस्था पर बड़ा सवाल।
वर्तमान में कॉलेज में करीब 86 छात्राएं अध्ययनरत बताई जा रही हैं। प्रथम वर्ष में 30 सीटें स्वीकृत होने की जानकारी है।
इतनी संख्या में छात्राओं के बीच नियमित शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आना गंभीर विषय है। यदि कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं होतीं और छात्राओं को स्वयं अध्ययन या एक-दूसरे को पढ़ाने पर निर्भर रहना पड़ता है, तो प्रशिक्षण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए करीब 4 किलोमीटर का सफर।
GNM छात्राओं को क्लीनिकल एवं प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाना पड़ता है। वर्तमान कॉलेज परिसर यानी वर्किंग वूमंस हॉस्टल से अस्पताल की दूरी करीब 4 किलोमीटर बताई जा रही है।
लेकिन छात्राओं के लिए नियमित बस या अन्य परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में छात्राओं को अपने साधनों से या कई बार पैदल अस्पताल पहुंचना पड़ता है।
यहां सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण है। जब छात्राएं अपने प्रशिक्षण के लिए सरकारी संस्थान से अस्पताल जा रही हैं, तो उनके सुरक्षित और नियमित आवागमन के लिए संस्थागत व्यवस्था क्यों नहीं है?
दूसरे विद्यार्थियों के लिए बस, GNM छात्राओं को इंतजार।
जानकारी के अनुसार औद्योगिक उपक्रमों द्वारा CSR के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए कॉलेज और हॉस्टल के बीच आवागमन की बस सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वहीं GNM कॉलेज की छात्राओं के लिए ऐसी सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।
इस संबंध में CMHO डॉ. एसएन केसरी ने खनिज न्यास मद से बस की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर से निवेदन किए जाने की बात कही है।
यानी जरूरत सामने है, समस्या स्वीकार की जा रही है, लेकिन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अभी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।
करीब एक दशक से स्थायी भवन का इंतजार।
कॉलेज के पास अपना स्थायी भवन नहीं होने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कॉलेज पिछले करीब एक दशक से स्थायी भवन के बिना संचालित हो रहा है और पिछले करीब तीन वर्षों से वर्किंग वूमंस हॉस्टल में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
नर्सिंग जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम के लिए पर्याप्त कक्षाएं, प्रयोगात्मक प्रशिक्षण की सुविधाएं, नियमित शिक्षक और सुरक्षित परिवहन जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं होना आवश्यक है।
ऐसे में सवाल यह है कि स्थायी भवन के निर्माण अथवा उपलब्धता की दिशा में अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?
CMHO ने माना—6 शिक्षक पद रिक्त
कोरबा के CMHO डॉ. एसएन केसरी ने 6 स्वीकृत शिक्षक पदों के फिलहाल रिक्त होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर 3 कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है तथा कॉलेज में एक प्राचार्य पदस्थ हैं।
CMHO के अनुसार छात्राओं को प्रैक्टिकल के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन फिलहाल बस की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बस व्यवस्था के लिए खनिज न्यास विभाग से सहयोग लेने के संबंध में कलेक्टर से निवेदन किए जाने की बात कही गई है।
शिक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी शासन को होने तथा जिला स्तर से समय-समय पर पत्राचार किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी।
अब सवाल सिर्फ ‘व्यवस्था सुधारने’ का नहीं, समय-सीमा का है।
अधिकारियों की ओर से शासन को पत्राचार किए जाने और व्यवस्थाओं में सुधार की बात कही जा रही है। लेकिन छात्राओं के लिए मूल सवाल अब भी बरकरार हैं—
छह स्वीकृत शिक्षक पदों पर नियुक्ति कब होगी?
कॉलेज को स्थायी भवन कब मिलेगा?
छात्राओं के लिए सुरक्षित परिवहन सुविधा कब शुरू होगी?
नियमित थ्योरी और क्लीनिकल प्रशिक्षण सुनिश्चित करने की ठोस व्यवस्था कब होगी?
और सबसे महत्वपूर्ण—इन सभी समस्याओं के समाधान की समय-सीमा आखिर तय क्यों नहीं की जा रही है?
नर्सिंग केवल डिग्री या डिप्लोमा हासिल करने का माध्यम नहीं है। यह ऐसा पेशा है जिसमें प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के ऊपर मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां आती हैं। ऐसे में सरकारी GNM कॉलेज की व्यवस्थाओं को मजबूत करना केवल छात्राओं की सुविधा का विषय नहीं, बल्कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता, छात्राओं के भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा अहम मुद्दा है।
अब देखना होगा कि वर्षों से रिक्त पड़े शिक्षक पद, स्थायी भवन और परिवहन सुविधा जैसी समस्याओं पर जिम्मेदार विभाग केवल पत्राचार तक सीमित रहता है या फिर धरातल पर ठोस बदलाव भी नजर आता है।

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