✍️ रायपुर / कोरबा। हरदी बाजार की 14 साल की मासूम मुस्कान चौहान आत्महत्या कांड में अब बड़ा मोड़ आ गया है। सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे की लगातार लड़ाई आखिरकार रंग लाई है। आपको बता दे,कि मामले को गंभीरता से लेते हुए। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, रायपुर ने पूरे मामले पर संज्ञान ले लिया है और पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा को नोटिस जारी कर निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा जारी आदेश क्रमांक 686/आयोग/2026, दिनांक 03/09/2026 में साफ लिखा है कि यह मामला अब दर्ज कर लिया गया है।
आयोग ने SP कोरबा को क्या आदेश दिया है?
आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि –
1. आवेदक प्रमोद कुमार बंजारे के आवेदन पत्र क्रमांक 73 दिनांक 20.08.2026 में उल्लेखित पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
2. श्री नरेश कुमार चौहान की नाबालिग पुत्री का सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने और दिनांक 21.07.2026 एवं 22.07.2026 को थाना हरदी बाजार में शिकायत दर्ज न किए जाने के कारण नाबालिग द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले की गहराई से जांच हो।
3. आयोग ने बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13 (ज), 14 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए निर्देशित किया है कि जांच अधिकारी को प्रतिवेदन सहित दिनांक 08/10/2026 को अपरान्ह 02:00 बजे आयोग कार्यालय, रायपुर में उपस्थित होने हेतु निर्देशित करें।
4. जांच में दोषी पाए जाने की दशा में दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए।
क्या था पूरा मामला जिस पर आयोग को लेना पड़ा संज्ञान?
ग्राम हरदी बाजार की 14 वर्षीय मुस्कान चौहान की फोटो आरोपी निखिल कंवर और उसके परिवार द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई थी। इससे आहत होकर पिता नरेश चौहान बेटी को लेकर 21 जुलाई और 22 जुलाई 2026 को थाना हरदी बाजार में शिकायत दर्ज कराने गए थे। परिवार का आरोप है कि थाना प्रभारी ने उनकी शिकायत सुनने तक से इंकार कर दिया और FIR दर्ज नहीं की। इस सामाजिक बदनामी और पुलिस की बेरुखी से क्षुब्ध होकर 24 जुलाई 2026 को 14 साल की मासूम ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी।
प्रमोद बंजारे की मुहिम लाई रंग।
इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन सर्व पत्रकार एकता महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे ने हार नहीं मानी। उन्होंने पहले राष्ट्रपति को पत्र लिखा और अब बाल अधिकार आयोग तक मामला पहुंचाया। आयोग द्वारा संज्ञान लेना उनकी पहली बड़ी जीत है। प्रमोद बंजारे ने कहा कि अब कोरबा पुलिस को आयोग के सामने जवाब देना होगा कि आखिर 2 दिन तक थाने के चक्कर काटने के बावजूद एक नाबालिग बच्ची की शिकायत क्यों नहीं लिखी गई? थाने की CCTV फुटेज और रोज़नामचा कहां है? अब सभी की निगाहें 08 अक्टूबर 2026 पर टिकी हैं, जब कोरबा पुलिस को जांच प्रतिवेदन के साथ रायपुर आयोग के सामने पेश होना है।

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