बिलासपुर: मसीही समाज के सामाजिक कार्यकर्ता विजय मेश्राम ने रविवार की सामूहिक आराधना को लेकर विश्वासियों से एकजुट रहने और निडर होकर चर्च पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आराधना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और संवैधानिक अधिकार की अभिव्यक्ति है।
हाल के दिनों में प्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में मसीही समाज के लोगों, प्रार्थना सभाओं और चर्चों को लेकर उत्पन्न विवादों एवं घटनाओं ने अनेक विश्वासियों के मन में चिंता और भय का वातावरण पैदा किया है। ऐसे समय में विजय मेश्राम ने समाज को साहस, संयम और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वर्तमान समय भय या दुविधा में रहने का नहीं, बल्कि विश्वास, साहस और एकता के साथ आगे बढ़ने का है। उन्होंने मसीही समाज से शांति और अनुशासन बनाए रखते हुए अपने-अपने प्रार्थना भवनों में उपस्थित होकर नियमित आराधना जारी रखने का आग्रह किया।
विजय मेश्राम ने कहा, आराधना रोकना भय को स्वीकार करना है, जबकि प्रार्थना करना विश्वास, साहस और स्वतंत्रता का प्रतीक है। हमें किसी भी परिस्थिति में अपने विश्वास से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं किसी प्रकार की कठिनाई या विरोध की स्थिति उत्पन्न होती है तो समाज को कानून और संविधान पर भरोसा रखते हुए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। मसीही समाज हमेशा प्रेम, सेवा और शांति के मूल्यों का पालन करता आया है और आगे भी करता रहेगा।
उन्होंने समाज के लोगों से घरों में सीमित न रहकर अपनी मंडलियों के साथ जुड़ने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आस्था को मजबूत करने का आह्वान किया।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि मसीही समाज सत्य, प्रेम और शांति के मार्ग पर चलने वाला समाज है। इसलिए हर परिस्थिति में विश्वास, धैर्य और एकता बनाए रखते हुए परमेश्वर पर भरोसा रखना आवश्यक है। डर नहीं, विश्वास हमारी पहचान बने।

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