**कोरबा।** जिले में आम नागरिकों को समय पर एवं सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने रक्त सेवा व्यवस्था को और अधिक सशक्त किया है। कलेक्टर **कुणाल दुदावत** के मार्गदर्शन में की गई इस पहल से अब गंभीर परिस्थितियों में मरीजों को जीवनरक्षक रक्त और रक्त अवयव समय पर मिल पा रहे हैं।
वर्तमान में कोरबा जिले में 01 शासकीय ब्लड सेंटर (मेडिकल कॉलेज संबद्ध चिकित्सालय) तथा 04 निजी ब्लड सेंटर संचालित हैं, जिनमें:
* **बिलासा ब्लड सेंटर**
* **संवेदना ब्लड सेंटर**
* **बालाजी ब्लड सेंटर**
* **कटघोरा ब्लड सेंटर**
शामिल हैं।
ब्लड कंपोनेंट सुविधा से तीन गुना लाभ
शासकीय ब्लड सेंटर एवं तीन निजी ब्लड सेंटर्स में ब्लड कंपोनेंट (रक्त अवयव पृथक्करण) सुविधा उपलब्ध है। इस तकनीक के माध्यम से एक यूनिट रक्त से तीन अलग-अलग घटक—
* **रेड ब्लड सेल्स (RBC)**
* **प्लाज्मा**
* **प्लेटलेट्स**
—तैयार किए जाते हैं, जो तीन अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोगी सिद्ध होते हैं।
किस स्थिति में कौन-सा रक्त अवयव उपयोगी?
* **आरबीसी (RBC)**: एनीमिया एवं अत्यधिक रक्तस्राव के मामलों में
* **प्लेटलेट्स**: डेंगू, कैंसर उपचार और कीमोथेरेपी के दौरान
* **प्लाज्मा**: गंभीर जलन, लिवर रोग एवं रक्तस्राव विकारों में
इस सुविधा के शुरू होने से रक्त की उपलब्धता अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित हो रही है।
प्रोसेसिंग शुल्क और निःशुल्क प्रावधान
शासकीय ब्लड सेंटर में संपूर्ण रक्त हेतु **1100 रुपये** तथा निजी ब्लड सेंटरों में **1550 रुपये** प्रोसेसिंग शुल्क निर्धारित है। यह शुल्क रक्त की जांच और प्रोसेसिंग के लिए लिया जाता है।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों, सिकलसेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया से पीड़ित रोगियों को शासकीय प्रावधानों के अनुसार **निःशुल्क रक्त उपलब्ध** कराया जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विशेष राहत मिल रही है।
– राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जांच अनिवार्य
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना, प्रसव, बड़ी सर्जरी, एनीमिया, कैंसर उपचार और डेंगू जैसी गंभीर स्थितियों में रक्त जीवन रक्षक तत्व के रूप में अत्यंत आवश्यक होता है।
सुरक्षित रक्त सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक यूनिट की जांच निम्न संक्रमणों के लिए अनिवार्य रूप से की जाती है:
* एचआईवी
* हेपेटाइटिस-बी
* हेपेटाइटिस-सी
* मलेरिया
* सिफलिस
सभी जांच राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप की जाती हैं, जिससे मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध हो सके। अब जिले के मरीजों को रक्त के लिए बाहर के शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
स्वैच्छिक रक्तदान: एक सामाजिक दायित्व
जिले में समय-समय पर सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों एवं स्वयंसेवी समूहों के सहयोग से रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं। इन शिविरों से आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
**ई-रक्तकोष पोर्टल** के माध्यम से भी रक्त की उपलब्धता की जानकारी पारदर्शी रूप से प्राप्त की जा सकती है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आमजनता से अपील की है कि वे स्वैच्छिक रक्तदान को जीवन का सामाजिक दायित्व समझें।
कौन कर सकता है रक्तदान?
* आयु 18 से 65 वर्ष
* निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप स्वस्थ व्यक्ति
* वर्ष में 3 से 4 बार सुरक्षित रूप से रक्तदान संभव
विशेषज्ञों के अनुसार रक्तदान से स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। बल्कि यह नियमित स्वास्थ्य जांच का अवसर भी प्रदान करता है। रक्तदान प्रक्रिया में उपयोग होने वाले सभी उपकरण पूरी तरह स्टरलाइज्ड होते हैं, जिससे संक्रमण का कोई खतरा नहीं रहता।
जीवन बचाने की पहल
स्वास्थ्य विभाग की इस सुदृढ़ व्यवस्था से कोरबा जिले में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को नई मजबूती मिली है। ब्लड कंपोनेंट सुविधा, पारदर्शी प्रोसेसिंग शुल्क, निःशुल्क रक्त प्रावधान और ई-रक्तकोष जैसी व्यवस्थाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसी भी जरूरतमंद को रक्त के अभाव में उपचार से वंचित न रहना पड़े।
**एक यूनिट रक्त—तीन जीवन बचाने की शक्ति।**
अब जरूरत है समाज के हर जागरूक नागरिक की सहभागिता की।

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