✍️ साइबर फ्रॉड केस को रफा-दफा करने के एवज में रकम लेने का आरोप, ASI और आरक्षक भी सह-आरोपी; विशेष CBI अदालत ने DGP और CBI निदेशक से मांगी Action Taken Report

रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 2022 बैच के ट्रेनी आईपीएस अधिकारी राहुल बंसल इन दिनों कथित तौर पर एक बड़े रिश्वत प्रकरण को लेकर चर्चा में हैं। उन पर आरोप है कि सरगुजा जिले में CSP के रूप में पहली फील्ड पोस्टिंग के दौरान एक साइबर फ्रॉड मामले को दबाने या निपटाने के एवज में एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी और ली गई।
शिकायत के मुताबिक, कथित रकम का लेनदेन एक साथ नहीं हुआ, बल्कि मई 2026 में 50-50 लाख रुपये की दो किस्तों में हवाला चैनलों के जरिए किया गया।
साइबर थाने के ASI और आरक्षक भी घेरे में
इस मामले में राहुल बंसल के अलावा सरगुजा साइबर थाने में तैनात रहे सहायक उप-निरीक्षक (ASI) प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को भी सह-आरोपी बनाए जाने की बात सामने आई है।
शिकायतकर्ता ने कथित लेनदेन से जुड़े व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के साथ दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष CBI अदालत का रुख किया।
अदालत ने DGP और CBI निदेशक से मांगी रिपोर्ट
मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और CBI निदेशक से Action Taken Report (ATR) तलब की है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और जांच किस दिशा में जाती है, इस पर नजर बनी हुई है।
हालांकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है और संबंधित अधिकारियों का दोष सिद्ध होना जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगा।
कभी ₹500 की रिश्वत पर जताई थी नाराजगी, अब ₹1 करोड़ के आरोप से चर्चा में
इस पूरे मामले ने इसलिए भी ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं क्योंकि राहुल बंसल का एक पुराना मॉक इंटरव्यू वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
सिविल सेवा की तैयारी के दौरान दिए गए इस मॉक इंटरव्यू में बंसल ने देश में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस सुधारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी थी।
वीडियो में उन्होंने अपने भाई से जुड़ा एक पुराना अनुभव साझा करते हुए बताया था कि आईआईटी कानपुर में पढ़ाई के दौरान उनके भाई को एक रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन के लिए अमेरिका जाना था। इसके लिए तत्काल जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत थी। उनके मुताबिक, उस समय एक पंचायत अधिकारी ने दस्तावेज जल्दी तैयार करने के बदले ₹500 की रिश्वत मांगी थी।
बंसल ने इंटरव्यू में इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि ₹500 की रिश्वत देना उन्हें बेहद बुरा लगा था।
“कुछ लोग भ्रष्ट हो सकते हैं, पूरी व्यवस्था नहीं”
मॉक इंटरव्यू में राहुल बंसल ने यह भी कहा था कि व्यवस्था में कुछ लोग भ्रष्ट हो सकते हैं, लेकिन इसके आधार पर पूरी व्यवस्था को गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार से निपटने की जरूरत पर भी अपनी राय रखी थी।
आज उसी पुराने वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके कथित तौर पर ₹1 करोड़ की रिश्वत के मामले से जुड़ने को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अब जांच पर टिकी निगाहें
एक ओर पुराना वीडियो ईमानदार प्रशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सोच की तस्वीर पेश करता है, वहीं दूसरी ओर वर्तमान में सामने आए आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ₹500 की रिश्वत को लेकर कभी व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला अधिकारी वास्तव में ₹1 करोड़ के कथित रिश्वत प्रकरण में शामिल था? इसका जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

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