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मंत्री से फीता कटवाया, बिना नर्सिंग एक्ट होम के संचालन नियमों को किनारे लगाया — स्वास्थ्य विभाग बना मूकदर्शक
400 रुपये पर्ची, 500 रुपये ECG… बिना अनुमति चल रही OPD, मरीजों से वसूली जारी
कोरबा : कहते हैं कानून सबके लिए बराबर होता है, लेकिन कोरबा में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। टीपी नगर में हाल ही में शुरू हुआ “शिवाय हॉस्पिटल” इन दिनों सवालों के घेरे में है। वजह साफ है — लाइसेंस की प्रक्रिया अधूरी, लेकिन इलाज और वसूली पूरी रफ्तार में।
जानकारी के अनुसार 100 बिस्तरों वाले इस निजी अस्पताल के संचालन के लिए 2 मार्च 2026 को स्वास्थ्य विभाग में लाइसेंस हेतु आवेदन दिया गया। आवेदन देने के बाद फाइल अभी दफ्तरों की मेजों पर घूमना भी शुरू नहीं हुई थी कि 5 मार्च से ही अस्पताल में OPD शुरू कर दी गई।
पूजा-अर्चना के साथ डॉक्टरों ने मरीज देखना शुरू कर दिया, पर्चियां कटने लगीं और जांचें भी लिखी जाने लगीं।
फिर 7 मार्च को श्रम मंत्री के हाथों फीता कटवाकर अस्पताल का औपचारिक उद्घाटन कर दिया गया — मानो नियम-कानून की सारी औपचारिकताएं पहले ही पूरी हो चुकी हों।
नियमों की किताब कुछ कहती है, जमीनी हकीकत कुछ और
स्वास्थ्य विभाग के नियम साफ कहते हैं कि किसी भी अस्पताल में OPD, IPD या जांच सेवा शुरू करने से पहले संचालन लाइसेंस अनिवार्य है।
बिना अनुमति मरीज की पर्ची काटना भी नियमों के खिलाफ माना जाता है।
लेकिन टीपी नगर में हालात इसके ठीक उलट हैं।
मरीजों से 400 रुपये OPD पर्ची शुल्क लिया जा रहा है और जांच के लिए भी लिखा जा रहा है। कई मरीजों को ECG जांच के लिए कहा गया, जिसके लिए 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
मरीजों का कहना है कि बाहर यही जांच करीब 300 रुपये में हो जाती है।
“त्योहार में सोया विभाग, अस्पताल दौड़ पड़ा”
लाइसेंस आवेदन के बाद 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली का त्योहार रहा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि विभागीय फाइल आगे नहीं बढ़ी होगी।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू ही हुई थी, तब 5 मार्च से अस्पताल कैसे चालू हो गया?
क्या विभाग को इसकी भनक नहीं लगी…या फिर किसी अदृश्य संरक्षण ने नियमों को किनारे कर दिया?
“निरीक्षण बाकी, कारोबार शुरू”
नियमों के मुताबिक अस्पताल का निरीक्षण होगा, रिपोर्ट बनेगी और उसके बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लगना तय माना जा रहा है।
लेकिन जब तक यह प्रक्रिया पूरी होगी, तब तक मरीजों की जांच और वसूली जारी रहेगी या प्रशासन नियमों का डंडा चलाएगा, यह देखने वाली बात होगी।
फिलहाल शहर में चर्चा गर्म है—
क्या कोरबा में अब अस्पताल भी पहले खुलेंगे और लाइसेंस बाद में मिलेगा?
और सबसे बड़ा सवाल…
आखिर किस “संरक्षण” के भरोसे नियमों को खुलेआम चुनौती दी जा रही है, और स्वास्थ्य विभाग खामोश क्यों है?

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