✍️ 10 दिन में समाधान नहीं हुआ तो चक्काजाम की चेतावनी, वर्षों पुराने भूमि रिकॉर्ड और राजस्व मामलों के निराकरण की मांग
कोरबा। ग्राम पंचायत नकटीखार में वर्षों से लंबित जनहित के मुद्दों को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। जनपद पंचायत क्षेत्र क्रमांक 20 की सदस्य मोनिका अरविंद भगत के नेतृत्व में ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आठ प्रमुख मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि तय समयसीमा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो नकटीखार में चक्काजाम कर आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों की मांगों में सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, भूमि रिकॉर्ड एवं नक्शा सुधार, वर्षों से लंबित राजस्व प्रकरण, खेल मैदान तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इनमें सबसे गंभीर मामला जमीन के नक्शे और राजस्व रिकॉर्ड में कथित त्रुटियों से जुड़ा है, जिसे लेकर ग्रामीण लंबे समय से तहसील और न्यायालय के चक्कर लगाने की बात कह रहे हैं।
आठ मांगों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित।
ग्रामीणों ने शासकीय प्राथमिक शाला नकटीखार से तालाबपारा मार्ग पर तालाब के पास पुलिया निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि इस मार्ग पर आवागमन में परेशानी होती है और इसका सीधा असर स्कूली बच्चों सहित ग्रामीणों पर पड़ता है।
इसके साथ ही शासकीय प्राथमिक शाला नकटीखार के लिए स्वीकृत दो भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग उठाई गई है। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण बच्चों को पुराने एवं जर्जर भवन में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
नक्शे की गलती से किसान परेशान, गांव में राजस्व कैंप की मांग।
ज्ञापन का सबसे अहम और संवेदनशील मुद्दा मसनहाती ग्राम के समय हुए बंदोबस्त के दौरान नक्शे में हुई त्रुटियों को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि नक्शे में गलतियों के कारण कई किसानों को अपनी जमीन से जुड़े मामलों के लिए तहसील और न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि नकटीखार में राजस्व विभाग का विशेष शिविर लगाकर मौके पर ही नक्शा एवं रिकॉर्ड की त्रुटियों का परीक्षण और सुधार किया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही परेशानी का स्थायी समाधान हो सके।
इसी तरह कुछ किसानों की पुरानी जमीन बंदोबस्त के बाद वर्तमान रिकॉर्ड एवं नक्शे में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज होने का मामला भी ज्ञापन में उठाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ मामले 13-14 वर्षों से तहसील न्यायालय में लंबित हैं। इन प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की मांग की गई है।
सड़क और डामरीकरण की मांग भी प्रमुख।
ग्रामीणों ने भालूसटका के देवरास मोहल्ला जाने वाले मार्ग पर कांक्रीट सड़क, अटल चौक से अंधारदहरा मार्ग पर कांक्रीट सड़क तथा नकटीखार के ऊपर मोहल्ला होते हुए मुलसीडीह मार्ग का डामरीकरण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन मार्गों के निर्माण एवं सुधार से आसपास के मोहल्लों के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
खेल मैदान के पट्टे की मांग।
भालूसटका स्थित खेल मैदान का मुद्दा भी ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक खेल मैदान को अब तक सामुदायिक वनाधिकार के तहत पट्टा नहीं दिया गया है। ग्रामीणों ने धार्मिक एवं खेल गतिविधियों के लिए मैदान का तत्काल पट्टा प्रदान करने की मांग की है।
पुराने विवादों की छाया, फिर सामने आया जमीन का मुद्दा।
नकटीखार में जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा विवाद नया नहीं है। वर्षों पहले प्रकाशित अखबारी रिपोर्टों में भी झगरहा, नकटीखार और दादर क्षेत्र के नक्शे, जमीन के सर्वे और राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा सामने आ चुका है।
पुरानी रिपोर्टों में सर्वे के दौरान जमीन के नंबरों में त्रुटियां सामने आने, सरकारी जमीन से जुड़े विवाद, वर्षों से जमीन पर कब्जा होने के बावजूद रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं होने तथा जमीन संबंधी मामलों की बढ़ती संख्या जैसे विषयों का उल्लेख किया गया था। उस समय भी पुराने अभिलेखों और नए रिकॉर्ड का मिलान कर त्रुटियों की जांच की बात सामने आई थी।
वर्षों बाद भी कायम हैं सवाल।
अब वर्ष 2026 में ग्रामीणों के नए ज्ञापन में भी नक्शा सुधार, वर्तमान रिकॉर्ड में दर्ज शासकीय भूमि से जुड़े मामलों और वर्षों से लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण की मांग की गई है। इससे यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि आखिर पुराने समय से चले आ रहे इन भूमि एवं राजस्व संबंधी मामलों का स्थायी समाधान कब होगा?
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार आवेदन और शिकायतों के बावजूद यदि समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो आंदोलन ही अंतिम रास्ता रह जाता है।
10 दिन का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं हुई तो चक्काजाम
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को 10 दिनों की समयसीमा दी है। उनका स्पष्ट कहना है कि इस अवधि में यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो नकटीखार में चक्काजाम कर आंदोलन किया जाएगा।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि ग्रामीणों की आठ सूत्रीय मांगों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है। खासकर वर्षों पुराने भूमि रिकॉर्ड, नक्शा सुधार और लंबित राजस्व प्रकरणों का समाधान होता है या फिर नकटीखार का यह मुद्दा एक बार फिर आंदोलन का रूप लेता है।

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